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कबूतर की पीड़ा

4.6
605

एक कबूतरी एक कबूतर, बैठे नीम की डाल पर। प्रेम से दोनों बतियाते हैं, झूल रहे हैं डाल पर॥ गुटर गूं गुटर गूं करके, कबूतरी ने छेड़ी बात। क्यों इतनी गर्मी है प्यारे, क्यों नहीं आती है बरषात? पहले तो इस पेड़...

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समीक्षा
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  • कुल टिप्पणी
  • author
    अभिनव राज
    09 பிப்ரவரி 2019
    शहरीकरण का काला भाग दिखाती ये रचना लाजबाब है ।
  • author
    Praveen Kumar
    17 அக்டோபர் 2017
    today's truth
  • author
    Sweta Pant "Seemu"
    20 ஜனவரி 2023
    ati sunder Can you please read my stories and poems and please give me support
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  • author
    अभिनव राज
    09 பிப்ரவரி 2019
    शहरीकरण का काला भाग दिखाती ये रचना लाजबाब है ।
  • author
    Praveen Kumar
    17 அக்டோபர் 2017
    today's truth
  • author
    Sweta Pant "Seemu"
    20 ஜனவரி 2023
    ati sunder Can you please read my stories and poems and please give me support