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आखिरी सत्य-(२ )
Nidhi Vyas
4.8
रात हो चुकी थी | करीब ९ बज रहे थे |फाटक के ऊपर बहुत बड़े अर्धगोलाकार बोर्ड पर लिखा था -" स्वामी विद्यासागर आश्रम " | आश्रम के बाहर दो चौकीदार थे | उन्होंने लड़की को बेहोश देखा तो घबरा गए | " अरे रामप्रसाद !जा..ताई को बता कर आ कि आश्रम के बाहर कोई लड़की बेहोश पड़ी है |" " हाँ..अभी जाता हूँ |" मालिनी ताई | उम्र ५२ वर्ष | करीब ५ साल से आश्रम में रह रही थी | पति ने दूसरी औरत के खातिर धर्मपत्नी को छोड़ दिया था | इस आश्रम में शरण मिली | तब से आश्रम में रहने और आने जाने वालों की सेवा करती थी और रसोई और...
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कहानी 'सफर ' अब किताब की शक्ल में अमेज़न पर उपलब्ध है.
https://www.amazon.in/सफ़र-Safar-निधि-व्यास-Nidhi/dp/9390791464/ref=sr_1_1?dchild=1&keywords=safar nidhi vyas&qid=1626935286&sr=8-1
सारांश
कहानी 'सफर ' अब किताब की शक्ल में अमेज़न पर उपलब्ध है.
https://www.amazon.in/सफ़र-Safar-निधि-व्यास-Nidhi/dp/9390791464/ref=sr_1_1?dchild=1&keywords=safar nidhi vyas&qid=1626935286&sr=8-1
आपकी ये कहानी वाकई बहुत अच्छी रचना है लेकिन जो कमियां एक साधारण लेखक करता है वही आपने की है जो इस रचना को कालजयी बनने में बाधक है
धार्मिक भेदभाव से परे रचना अधिक उत्तम होती ।
हैदर नाम इस कहानी में आपकी अपरिपक्व मानसिकता और धर्म की छोटी और कम सोच को दर्शाता है ।
हैदर का मैत्रयी से परिणय वास्तविकता से परे है ।
सभी मजहब / पंत समान है ये सत्य नही है, एक मजहब जिसमे बकरा काटा जाता है और एक जहा अहिंसा परमो धर्म है , समान नही हो सकते।
मांसाहारी और शाकाहारी समान नही हो सकते
तीन तलाक, बहु विवाह, हलाला और अन्नपूर्णा गृहस्वामिनी एकल विवाह पति/पत्नी व्रता कभी समान नही हो सकते ।
मानव का धर्म एक है
जो व्यवहार मुझे मेरे लिए अनुकूल और उचित लगता है वही प्राणिमात्र के लिए होना ही धर्म है ।
रिपोर्ट की समस्या
सुपरफैन
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ज़िंदगी वैसे ही अधूरी है और अब ये कहानी ......सच कहें बिल्कुल अच्छा नही लगा ये देखकर या यों कहें ऐसी आशा न थी.....पर इक सच तो ये भी है आप बहुत ही सटीक लिखती हैं मन बन्ध जाता है सब सजीव हो उठता है
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आपकी ये कहानी वाकई बहुत अच्छी रचना है लेकिन जो कमियां एक साधारण लेखक करता है वही आपने की है जो इस रचना को कालजयी बनने में बाधक है
धार्मिक भेदभाव से परे रचना अधिक उत्तम होती ।
हैदर नाम इस कहानी में आपकी अपरिपक्व मानसिकता और धर्म की छोटी और कम सोच को दर्शाता है ।
हैदर का मैत्रयी से परिणय वास्तविकता से परे है ।
सभी मजहब / पंत समान है ये सत्य नही है, एक मजहब जिसमे बकरा काटा जाता है और एक जहा अहिंसा परमो धर्म है , समान नही हो सकते।
मांसाहारी और शाकाहारी समान नही हो सकते
तीन तलाक, बहु विवाह, हलाला और अन्नपूर्णा गृहस्वामिनी एकल विवाह पति/पत्नी व्रता कभी समान नही हो सकते ।
मानव का धर्म एक है
जो व्यवहार मुझे मेरे लिए अनुकूल और उचित लगता है वही प्राणिमात्र के लिए होना ही धर्म है ।
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ज़िंदगी वैसे ही अधूरी है और अब ये कहानी ......सच कहें बिल्कुल अच्छा नही लगा ये देखकर या यों कहें ऐसी आशा न थी.....पर इक सच तो ये भी है आप बहुत ही सटीक लिखती हैं मन बन्ध जाता है सब सजीव हो उठता है
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