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आखिरी सत्य-आखिरी सत्य

4.5
19006

अंधविश्वास के प्रति जागरूक करती एक प्रेम कहानी |

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आखिरी सत्य-(२ )
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Nidhi Vyas
4.8

रात हो चुकी थी | करीब ९ बज रहे थे |फाटक के ऊपर बहुत बड़े अर्धगोलाकार बोर्ड पर लिखा था -" स्वामी विद्यासागर आश्रम " | आश्रम के बाहर दो चौकीदार थे | उन्होंने लड़की को बेहोश देखा तो घबरा गए | " अरे ...

लेखक के बारे में
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Nidhi Vyas

कहानी 'सफर ' अब किताब की शक्ल में अमेज़न पर उपलब्ध है. https://www.amazon.in/सफ़र-Safar-निधि-व्यास-Nidhi/dp/9390791464/ref=sr_1_1?dchild=1&keywords=safar nidhi vyas&qid=1626935286&sr=8-1

समीक्षा
  • author
    आपकी रेटिंग

  • कुल टिप्पणी
  • author
    avnish arya
    14 June 2019
    आपकी ये कहानी वाकई बहुत अच्छी रचना है लेकिन जो कमियां एक साधारण लेखक करता है वही आपने की है जो इस रचना को कालजयी बनने में बाधक है धार्मिक भेदभाव से परे रचना अधिक उत्तम होती । हैदर नाम इस कहानी में आपकी अपरिपक्व मानसिकता और धर्म की छोटी और कम सोच को दर्शाता है । हैदर का मैत्रयी से परिणय वास्तविकता से परे है । सभी मजहब / पंत समान है ये सत्य नही है, एक मजहब जिसमे बकरा काटा जाता है और एक जहा अहिंसा परमो धर्म है , समान नही हो सकते। मांसाहारी और शाकाहारी समान नही हो सकते तीन तलाक, बहु विवाह, हलाला और अन्नपूर्णा गृहस्वामिनी एकल विवाह पति/पत्नी व्रता कभी समान नही हो सकते । मानव का धर्म एक है जो व्यवहार मुझे मेरे लिए अनुकूल और उचित लगता है वही प्राणिमात्र के लिए होना ही धर्म है ।
  • author
    Manisha Sahu
    10 February 2019
    Me aaj fir yha pe likhne ke liye majbur hui,bhot hi achcha lga ekdam sachchai se paripurn thi jo aaj samaj me ho rha h apne usko bakhubi samjha hai
  • author
    कान्हा दासी
    26 April 2019
    ज़िंदगी वैसे ही अधूरी है और अब ये कहानी ......सच कहें बिल्कुल अच्छा नही लगा ये देखकर या यों कहें ऐसी आशा न थी.....पर इक सच तो ये भी है आप बहुत ही सटीक लिखती हैं मन बन्ध जाता है सब सजीव हो उठता है
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    avnish arya
    14 June 2019
    आपकी ये कहानी वाकई बहुत अच्छी रचना है लेकिन जो कमियां एक साधारण लेखक करता है वही आपने की है जो इस रचना को कालजयी बनने में बाधक है धार्मिक भेदभाव से परे रचना अधिक उत्तम होती । हैदर नाम इस कहानी में आपकी अपरिपक्व मानसिकता और धर्म की छोटी और कम सोच को दर्शाता है । हैदर का मैत्रयी से परिणय वास्तविकता से परे है । सभी मजहब / पंत समान है ये सत्य नही है, एक मजहब जिसमे बकरा काटा जाता है और एक जहा अहिंसा परमो धर्म है , समान नही हो सकते। मांसाहारी और शाकाहारी समान नही हो सकते तीन तलाक, बहु विवाह, हलाला और अन्नपूर्णा गृहस्वामिनी एकल विवाह पति/पत्नी व्रता कभी समान नही हो सकते । मानव का धर्म एक है जो व्यवहार मुझे मेरे लिए अनुकूल और उचित लगता है वही प्राणिमात्र के लिए होना ही धर्म है ।
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    Manisha Sahu
    10 February 2019
    Me aaj fir yha pe likhne ke liye majbur hui,bhot hi achcha lga ekdam sachchai se paripurn thi jo aaj samaj me ho rha h apne usko bakhubi samjha hai
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    कान्हा दासी
    26 April 2019
    ज़िंदगी वैसे ही अधूरी है और अब ये कहानी ......सच कहें बिल्कुल अच्छा नही लगा ये देखकर या यों कहें ऐसी आशा न थी.....पर इक सच तो ये भी है आप बहुत ही सटीक लिखती हैं मन बन्ध जाता है सब सजीव हो उठता है