pratilipi-logo प्रतिलिपि
हिन्दी

अधूरी मोहब्बत

168
4.4

प्रेम का एक, पुल बनाना चाहता था मैं, अपने और तुम्हारे दरमियाँ, ताकि कम हो सके, अंतर हमारे अंतरमन का, और पूरा हो जाये हमारा मिलना, पर बनने से पहले शंशय का एक तूफान उमड़ा, और उससे बनने से पहले ...