
प्रतिलिपिप्रिय लेखक,
मैं रंजीत, काफ़ी समय से आपको यह पत्र लिखने की सोच रहा था।
आज मैं यह शब्द किसी सीईओ या फाउंडर के रूप में नहीं लिख रहा हूँ, बल्कि एक ऐसे इंसान के रूप में लिख रहा हूँ, जिसके सपने और विज़न आप सभी की वजह से साकार हो पाए हैं।
मेरा हमेशा से यह सपना रहा है कि एक दिन हम ऐसा प्लेटफ़ॉर्म बनायें, जहाँ कहानी लिखने वाला कोई भी लेखक अपनी कहानी को भाषा, टेक्नोलॉजी या भूगोल की किसी भी रुकावट के बिना पूरी दुनिया के साथ साझा कर सके।
मुझे आज भी बेंगलुरु का वह छोटा-सा फ़्लैट साफ़ याद है, जहाँ सिर्फ़ पाँच लोगों ने मिलकर प्रतिलिपि की शुरुआत की थी।
हमें कोई नहीं जानता था। संसाधन भी कम थे। दुनिया की नज़रों में हम लगभग अदृश्य थे।
लेकिन तभी आप आए, हमारे लेखक।
आपने इस मंच को, जो उस वक्त चलना ही सीख रहा था, अपनी बेमिसाल कहानियों के किरदारों से जीवंत कर दिया।
पिछले 11 वर्षों के इस सफ़र में ऐसे अनगिनत पल आए, जब रास्ता बेहद कठिन लगने लगा। कई बार ऐसा लगा कि अब आगे बढ़ना शायद संभव नहीं है।
लेकिन हर बार जब मैं हार मानने के करीब पहुँचा, मैंने प्रतिलिपि ऐप खोला और देखा कि आप में से किसी एक ने एक नई कहानी प्रकाशित की है।
आपने सिर्फ़ कहानियाँ नहीं लिखीं।
आपने हमें उम्मीद दी।
आपने एक आइडिया को स्टार्टअप में बदला और एक स्टार्टअप को एक परिवार बना दिया।
एक ऐसा परिवार, जिसमें इंजीनियर्स हैं, प्रोडक्ट मैनेजर्स हैं, ऑथर रिलेशनशिप मैनेजर्स हैं, लीगल टीम है, लेकिन सबसे ज़्यादा मायने आप रखते हैं, हमारे क्रिएटर्स, जिनकी वजह से यह सब संभव है।
इस नए साल में प्रवेश करते हुए, मैं सिर झुकाकर आप सभी को नमन करता हूँ,
क्योंकि आप ही की वजह से हम आज यहाँ तक पहुँचे हैं,
और आप ही की वजह से हम और भी दूर तक पहुँचने के सपने देखने की हिम्मत कर पाते हैं।
मैं दिल से यह प्रार्थना करता हूँ कि माँ सरस्वती आपको अपना आशीर्वाद दें और आपके मन को असीम विद्या से भर दें।
2026 वह वर्ष हो, जब आपकी कल्पना एक अनंत नदी की तरह प्रवाहित हो।
आप अपनी रचनाओं से अपने पाठकों के जीवन को समृद्ध करें और अपनी कहानियों के माध्यम से उन्हें ऐसी दुनिया दिखाएँ, जिन्हें वे हमेशा सहेजकर रखना चाहें।
हमारा मिशन अभी शुरू ही हुआ है।
हम एक ऐसी कंपनी बनाना चाहते हैं, जो एक पूरी पीढ़ी को परिभाषित करे।
मेरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत सपना बहुत सरल है।
मैं एक ऐसी दुनिया देखना चाहता हूँ, जहाँ किसी लेखक को आमदनी के लिए कोई और नौकरी न करनी पड़े,
और प्रतिलिपि से होने वाली उसकी कमाई उसके परिवार का सहारा बने।
मैं ऐसा भविष्य बनाना चाहता हूँ, जहाँ आपकी कला आपका जीवन संभाले।
प्रतिलिपि पर आपकी कमाई आपको वह आज़ादी दे, जिसके लिए आप पैदा हुए हैं, लिखने की आज़ादी।
मैं जानता हूँ कि हम परफ़ेक्ट नहीं हैं।
लेकिन मैं आपसे यह वादा करता हूँ कि हम हमेशा आपको सुनते हैं,
चाहे आप हमारी तारीफ़ करें या हमें बताएँ कि हम कहाँ बेहतर हो सकते हैं।
हम हर दिन आपके इस घर को और सुरक्षित, अधिक पारदर्शी और आपके भरोसे के लायक बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
हमारा लेखक परिवार ही हमारे अस्तित्व का कारण है।
अगर आप अपनी यात्रा हमारे साथ साझा करना चाहते हैं, या यह बताना चाहते हैं कि हम और बेहतर कैसे बन सकते हैं, तो आप बे-झिझक हमारी टीम में किसी से भी संपर्क कर सकते हैं, मुझसे भी।
मैं हमेशा [email protected] पर उपलब्ध हूँ।
और अगर मैं स्वयं उत्तर देने के लिए सही व्यक्ति न भी हुआ, तो मैं यह सुनिश्चित करूँगा कि आपका संदेश हमारी टीम के सही व्यक्ति तक पहुँचे।
आपको, आपके परिवार को और आपके सभी प्रियजनों को नए साल की ढेरों शुभकामनाएँ।
प्रतिलिपि की कहानी हमारे साथ मिलकर लिखने के लिए आपका धन्यवाद।
शुभकामनाएं,
रंजीत प्रताप सिंह
Founder, Pratilipi