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उत्तराखंड
शाम का वक्त
एक बड़े से मेंशन के गार्डन में इस वक्त शादी की तैयारी चल रही थी। मेंशन काफी खूबसूरत था, जिसे बहुत खूबसूरती से सजाया गया था, लेकिन वहां मेहमान बहुत ही कम थे। मात्र गिने चुने लोग ही मौजूद थे।
वही गार्डन के बीचों बीच एक बड़ा सा मंडप बना हुआ था। जिसमें पंडित जी हवन कुंड में लकड़ियां डालते हुए कुछ मंत्र उच्चारण कर रहे थे।।
वही मंडप में एक आदमी दूल्हे के भेष में बैठा था। लेकिन देखकर उसकी हालत कुछ ठीक नहीं लग रही थी, उसकी शेरवानी गंदी सी थी, वहीं सर पर बंधा सेहरा भी टेढ़ा मेढा था। उस को देखकर लग रहा था कि उसकी उम्र यही कोई 35 से 40साल के बीच की थी।। वही उसके बगल उसी के जैसे 2 - 4 और आदमी भी बैठे हुए थे।
तभी दूल्हे की भेष में बैठा आदमी कुछ बोला और उसके बोलने से साफ पता चल गया कि वो फिल्हाल नशे में धुत है, वो एक शराबी है।।
और उसने अपने लड़खड़ाति हुई आवाज में पंडित जी से कहा, "हे पंडित, ये क्या कब से सिर्फ लकड़ी ही तोड़े जा रहा है। तुझे यहां लकड़ी तोड़ने के लिए नहीं शादी करवाने के लिए बुलाया गया है। तो जल्दी-जल्दी अपना काम कर और मेरी शादी करवा।" क्युकी अब मैं और इंतजार नहीं कर सकता,, ये कहते हुए उस आदमी के चेहरे पर एक मक्कारी भारी मुस्कान आ गई। वही उसी की जैसी हालत में बैठे हुए उसके अगल-बगल के आदमी भी हंस दिए।
वही इस आदमी की बात सुनकर पंडित जी ने उसे अजीब नजरों से देखा। फिर दुःखी होकर मन में बोले, "हे उपर वाले, ना जाने किस कलम से तूने उस लड़की का भाग्य लिखा है, जिससे इस आदमी की शादी हो रही है ।। और न जाने उस लड़की को उसके कौन से कर्मों की ऐसी सजा मिल रही है, जो उसे ऐसे घर वाले मिले हैं। उसके खुद के चाचा उसकी शादी इस शराबी से करवा रहे है। अब तो तू ही उसका सहारा है, भगवान। उस बिन मां-बाप की बच्ची पर कृपा कर और उसे इस दरिंदे की चंगुल से बचा ले।" कहते हुए वो फिर से शादी की तैयारियों में लग गए।
वहीं मेंशन के अंदर,,
एक कमरे में,,
उस कमरे में इस वक्त एक लड़की शादी का जोड़ा पहने सर से पांव तक ढकी हुई एक कुर्सी पर बैठी हुई थी। उसे देख कर लग रहा था जैसे वो कोई पुतला हो। वही उसके सामने इस वक्त तीन लोग और मैजूद थे।
एक मिडिल एज के आदमी औरत जो कि पति-पत्नी थे, और एक 25 साल का लड़का। जो कि उनका बेटा था।
तभी उस औरत ने अपने पति से धीमी मगर डरी आवाज में कहा, "प्रमोद जी, प्लीज़ ऐसा मत करिए। अगर आपको इसकी शादी करवानी ही है तो कम से कम किसी अच्छे इंसान से करवाइए, जो कम से कम इसकी उम्र का तो हो। जो समझदार हो इसका ख्याल रख सके।
औरत अभी अपनी बात खतम करती की उसकी बात सुनकर प्रमोद नाम के उस आदमी ने गुस्से से दांत पीसते हुए कहा, "क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है, प्रेमा। आखिर क्या चाहती हो तुम। मैं इसकी शादी एक समझदार इंसान से करवा दूं और इतने बड़े आहूजा इंडस्ट्री से हाथ धो बैठू। हरगिज़ नहीं।
अगर इसकी शादी किसी अच्छे लड़के से हो गई तो वो इसके नाम की सारी जमीन जायदाद अपने नाम करवा लेगा। और हमें फूटी कौड़ी तक नहीं मिलेगी। और अगर उस शराबी से हमने इसकी शादी करवा दी तो उसे कुछ पैसे देकर हम इस लड़की के पति का दस्तखत आसानी से उन जायदाद के पेपर पर करवा लेंगे।।
कहते हुए आदमी ने एक नजर उस गुमसुम लडकी को देखा, फिर आगे बोला, "और वैसे भी हम अपने हिस्से के आधे से ज्यादा जमीनों को बेच चुके हैं, और हमारे हिस्से का बिजनेस भी लगभग डूबने के कगार पर है। अब अगर कुछ हमें बचा सकता है तो वो भाई साहब की वो कीमती जमीन ही है। तो हमें जल्द से जल्द इसकी शादी करवानी ही होगी। जिससे हम वो पा सके जिसके लिए हमने पूरे 19 साल इंतजार किया है, अब और नहीं।
"वैसे भी उनके जाने के बाद उनकी इस मनहूस बेटी का ख्याल हमने ही रखा है, तो इसका कुछ तो फायदा हमें होना ही चाहिए।" कहते हुए उस आदमी ने मक्कारी भरी मुस्कुराहट के साथ सामने बैठी लड़की को देखा।
वहीं उनकी बात सुनकर प्रेमां ने एक बार फिर सर झुकाते हुए कहा, "लेकिन, आप ऐसे कैसे इसकी शादी एक शराबी इंसान से करवा सकते हैं। इसके न रहने का ठिकाना है ना नौकरी का। वो इस बच्ची का ख्याल कैसे रखेगा।
औरत की बात सुनकर वहां मौजूद उस 25 साल के लड़के ने भी अपनी बाप की तरह गुस्से से दांत पीसते हुए कहा, "मॉम, क्या आप वाकई पागल हो गई है। और किसने कहा की शराब पीना बुरी बात है, मैं और डैड भी तो पीते हैं। तो फिर आप भी इस घर से क्यों नहीं निकल जाती।"
लड़के की बात सुनकर प्रेमा की आंखें आश्चर्य से बड़ी हो गई और उसने हैरानी से कहा, "सोमित ये तुम क्या कह रहे हो बेटा। आखिर में इस घर को छोड़कर कहां जाऊंगी। और वैसे भी मैं उस आदमी की बात कर रही हूं, तुम उसकी तरह शराबी तो नहीं। जो दिन भर नशे में धुत रहे । माना कि कभी-कभार पार्टी वगैरा में तुम और तुम्हारे डैड ड्रिंक कर लेते हैं, लेकिन वो आदमी शराब के साथ न जाने और क्या-क्या नशे भी करता होगा उसे तो देखकर ही घिन आ रही है।"
प्रेमा की बात सुनकर प्रमोद ने एक बार फिर हल्के गुस्से से कहा , "तुम्हें इस लड़की की इतनी फिक्र करने की जरूरत नहीं है ! तुम्हारे अपने भी बच्चे हैं, तुम अपनी बेटी की फिक्र करो। उसकी शादी की तैयारी करो एक बार इस मनहूस को हम यहां से हटा दें, फिर ये सब कुछ हमारा हो जाएगा।
और तब हम अपनी बेटी को एक बड़े से घर में ब्याहेंगे। जहां वह हमेशा खुश रहेगी और राज करेगी। तुम्हें उसकी फिक्र होनी चाहिए, ना की इसकी।
अभी वो लोग बात कर ही रहे थे, कि तभी दरवाजे पर दस्तक हुई और एक लड़की अंदर आते हुए बहुत ही प्यारी मगर धीमी आवाज आई, "मां, पापा पंडित जी कह रहे हैं "दुल्हन को ले आया जाए।" तो आप लोग इसे लेकर जल्दी आइए।"
लड़की की ये बात सुनकर प्रमोद ने बेहद प्यार से कहा, "मन्नू बेटा, तुम अपने कमरे में जाओ, हम इसे लेकर मंडप में जा रहे हैं और अब तुम्हें वहां आने की कोई जरूरत नहीं।"
ये सुनकर लड़की ने बिना कोई बहस किए चुपचाप हा में सर हिलाया और वहां से चली गई।।
लड़की के जाते ही प्रेमा ने ना समझी में प्रमोद से कहा, "प्रमोद जी, आपने मानवी को मंडप में आने से मना क्यों किया ?"
ये सुनकर प्रमोद ने एक बार फिर उसे घूरते हुए कहा, "क्या तुम सच में बेवकूफ हो, पेमा। अगर तुम हो, तो रहो ।। लेकिन मैं बेवकूफ नहीं हूं। इसीलिए मैं नहीं चाहता कि वहां मौजूद लोगों की नजर मेरी बेटी पर पड़े।" अब चुपचाप इसे लेकर चलो ज्यादा बकवास मत करो। कहते हुए प्रमोद कमरे से बाहर चला गया।
वही प्रेमा ने उसकी बात सुनी तो उसके चेहरे पर एक दर्द भरी मुस्कान आ गई, फिर को उस लड़की की ओर बढ़ गई। उसने बड़ी मुश्किल से लड़की को उठाया तभी दूसरी तरफ से सोमित भी लड़की को पकड़ लिया। फिर वो दोनो ऊसे बाहर ले कर चले गए।
वहीं बाहर गार्डेन एरिया में,,
मौसम अचानक से, बदल गया। हाला की शाम ज्यादा नहीं थी लेकिन फिर भी आसमान में काले काले बादल उमड़ने लगे इस वजह से चारों तरफ अंधेरा छाने लगा। मौसम को देखते हुए ऐसा लग रहा था कि जैसे कोई आंधी तूफान आने को हो।
वहीं मंडप में इस वक्त सभी दुल्हन के आने का इंतजार कर रहे थे। तभी आगे आगे प्रमोद गार्डन में आए और उन्हीं के पीछे पीछे प्रेमा और सोमित दुल्हन को लेकर आए। दुल्हन को आता देख दूल्हे के चेहरे पर हैवानियत साफ नजर आने लगी , और उसके चेहरे की वो भद्दी मुस्कान और ज्यादा बड़ी हो गई।
तभी प्रमोद जाकर मंडप के सामने लगे कुर्सी पर बैठ गए और प्रेमा और सोमित ने दुल्हन को दूल्हे के बगल बैठा दिया। और प्रेमा भी दुल्हन के पीछे उसे सहारा दिए हुए बैठ गई। वही शोमित जाकर अपने डैड के बगल बैठ गया।
इसी के साथ पंडित जी ने मंत्र पढ़ने शुरू किया। लेकिन तभी अचानक से दूल्हे को उल्टी आने लगी और वो अपनी जगह से लड़खड़ाते हुए उठकर वहां से दूसरी ओर भागा। ये देख वहां मौजूद लोगों को हसी आ गई।
वही शोमित का मुंह बन गया। उसने प्रमोद से कहा, "जब इस बेवडे को अच्छी शराब पचती नही तो साला पीता क्यूं है। डैड, अब तो मुझे भी इस आदमी से घिन आ रही है। कम से कम आज के दिन तो ना पिता। ना पीने से मौत थोड़े हो जाती है इसकी।"
ये सुनकर प्रमोद में दूल्हे की ओर देखते हुए गंभीर आवाज में कहा, "छोड़ो तुम भी, अपनी मां जैसी बातें मत करो। और वैसे भी इतनी जल्दी मैं दूसरा लड़का कहां से लाता।
फिर उसने दुल्हन की ओर देखते हुए और सिरियस वॉइस में कहा, "अगले 2 दिन बाद ये लड़की 19 साल की हो जाएगी। और अगर उससे पहले इसकी शादी नहीं हुई तो सारी प्रॉपर्टी ट्रस्ट को चली जायेगी। और अगर शादी हो गई तो इसकी सारी जायदाद इसके पति की हो जाएगी।" इसलिए मुझे जल्दबाजी में जो भी मिला मैं उसे ही ले आया। कम से कम ये गवार आदमी बिना किसी खिच खिच के साइन तो कर देगा। जहां उसकी दो-चार बोतल थमा दिया उतने में ही वो खुश। और इसी के साथ हमारी जिंदगी भी ऐश।"
ये कहते हुए प्रमोद के चेहरे पर एक शैतानी मुस्कुराहट आ गई वही उसका बेटा भी उसके साथ मुस्कुरा दिया।।
तभी वो दूल्हा वापस से मंडप में आया। उसे देख पंडित जी ने एक बार फिर मुंह बनाते हुए मंत्र पढ़ना शुरू किया।।
वही मेंशन के सबसे ऊपरी फ्लोर के एक कमरे की खिड़की पर खड़ी मानवी, गार्डन में हो रही हो शादी को देख रही थी। इस वक्त मानवी की आंखों में आंसू था। तभी उसने अपने आंसुओं को साफ करते हुए खुद से कहा, "I'm sorry, आरू, तुम्हारी बहन तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर पा रही। लेकिन वो भगवान जी से तुम्हारे लिए हर एक पल प्रार्थना कर रही है, की काश कोई चमत्कार हो जाए। और तुम्हें तुम्हारी तकलीफों से छुटकारा मिले। मैं हरगिज़ नहीं चाहती तुम्हारी शादी उस घटिया इंसान से हो।
मुझे तो शर्म आती है, अपने बाप को अपना बाप कहते हुए। क्योंकि आज तुम्हारी जो हालात है उसके जिम्मेदार मेरे बाप और भाई ही। मैं और मॉम चाह कर भी तुम्हारे लिए कुछ नहीं कर पाए। बचपन से लेकर आज तक डैड ने तुम्हारे साथ बहुत गलत किया है, और आज भी वो बहुत बड़ी गलती कर है । इसके लिए मैं उन्हें कभी माफ नहीं करूंगी, कभी नहीं।" ये कहते हुए मानवी की आंखों से झर झर आंसू बहने लगे।
वहीं नीचे गार्डन में पंडित जी अभी विधिवत मंत्र पढ़ रहे थे कि तभी दूल्हे में खींझते हुए कहा, "हे पण्डित चुप, ये क्या कितनी देर से बकर बकर किया जा रहा है। मुझे सारे विधि विधान नहीं करने चुपचाप फेरे के मंत्र पढ़। मैं मंगलसूत्र और सिंदूर पहनाऊ, और जल्दी-जल्दी ये शादी खत्म हो। मुझे और ज्यादा वक्त बर्बाद नहीं करना।
ये कहते हुए उसके चेहरे पर एक अजीब मुस्कुराहट आ गई और उसने अपने कंधे से दुल्हन को हल्का धक्का दिया। वही उसकी बात सुनकर पंडित जी को बहुत गुस्सा आ रहा था। और उसने गुस्से में उसे डांटते हुए कहा, "जजमान, आप थोड़ी देर शांत बैठिए। आपके कहने से ये शादी नहीं होगी, शादी का जो विधान है मैं उसी तरीके से करवाऊंगा।"
फिर पंडित जी ने प्रमोद की ओर देखकर कहा, "श्रीमान जी, आप आगे आइए और कन्या के कन्यादन की रस्म अदा कीजिए।
लेकिन पंडित जी की बात पर प्रमोद अपनी जगह से नहीं उठा बल्कि वो इस तरह बैठे हुए बोला, "पंडित जी, आप ज्यादा परेशान मत होइए जैसा दूल्हा कह रहा है वैसा ही करिए। और जल्दी से विवाह कार्य पूरा कराइए।"
प्रमोद जी की बात सुनकर पंडित जी हैरान हो गए लेकिन उन्होंने उनसे कुछ नहीं कहा। बल्कि आसमान की ओर देखते हुए अपने मन में बोले, "हे प्रभु मुझे माफ कर दीजिएगा! अब जब आप ही कोई चमत्कार नहीं कर रहे हैं तो मैं तुच्छ प्राणी क्या ही कर सकता हूं मैं अपना काम कर रहा हूं , आगे जो कुछ होगा वो आपकी मर्जी होगी।"
इसी के साथ पंडित जी ने सबसे पहले फेरे के मंत्र पढ़ना शुरू किया। वही दूल्हे के चेहरे पर मुस्कान आ गई।
एक तरफ मेहमान जो चुपचाप तमाशा देख रहे थे उन्हीं के साथ प्रमोद और सोमित भी सामने हो रहे शादी को देख रहे थे। वही प्रेमा चुपचाप दुल्हन को पकड़े बैठी थी। उन्होंने सब कुछ किस्मत पर छोड़ दिया था यही हाल मानवी का भी था।
तभी पंडित जी ने दूल्हे से कहा, अब आप दोनों फेरों के लिए खड़े हो जाइए।
"खडे" होने की बात सुनकर प्रमोद ने आगे बढ़कर कहा, "पंडित जी जरूरी है लड़का लड़की का घूमना । आप इसके बजाय इनका गठबंधन को घुमा दीजिए। ऐसा भी होता है बहुत जगह।
पंडित जी उसकी ऐसी अजीबोगरीब बातें सुनकर बेहद फ्रस्ट्रेटेड हो गए थे। और उन्होंने झल्लाते हुए कहा, "अगर यही यही सब कुछ करना था तो आप लोगों ने खुद ही शादी क्यों नहीं करवादी। क्या जरूरत थी मेरा वक्त बर्बाद करने की।" कहते हुए पंडित जी अपना झोला उठाकर खड़े हो गए।
ये देख सभी हैरान।
तभी दूल्हे ने भी पण्डित जी से गुस्से से कहा, "हां, हां, पंडित तू पहली फुरसत में इधर से निकल। क्योंकि अब ये शादी तेरे बिना ही होगी।"
कहते हुए उसने इधर उधर कुछ ढूंढा, तभी उसकी नजर सिंदूर पर पड़ी। जिसे देखकर उसके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कुराहट आ गई और उसने एक नजर अपने बगल बैठी लड़की को देखा फिर आगे बढ़कर एक बार सिंदूर उठा लिया।"
उसकी ये हरकत देखकर वहां बैठे सभी मौजूदा लोग ना समझी मैं उसे देखने लगे। वही पंडित जी गुस्से से आग बबूला हो गए। उन्होंने उसी लहजे में कहा, "ये क्या कर रहे तुम? क्या तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है! तुम शादी जैसी पवित्र बंधन का अपमान कर रहे हो। शर्म आनी चाहिए तुम्हे?"
ये कह कर उन्होंने प्रमोद और शोमित की ओर देखते हुए कहा, "और आप लोग,, आप लोग बैठकर यहां तमाशा देख रहे हैं । आप लोग इस आदमी को रोकते क्यों नहीं।"
पंडित जी की बात सुनकर प्रमोद ने नॉर्मली कहा, "देखिए पंडित जी अब आपका यहां पर कोई काम नहीं है, तो अब आप शराफत से यहां से जा सकते हैं । ये शादी जैसे हो रही है उसे होने दीजिए।"
ये सुनते ही पंडित जी को बेहद गुस्सा आया वो गुस्से से लगभग कांपने लगे। क्योंकि उनसे ये सब कुछ देखा नहीं जा रहा था।
फिर उन्होंने दुल्हन की ओर देखते हुए कहा, "बेटी तुम चुपचाप क्यों बैठी हो, तुम खुद ही ये शादी को क्यों नहीं रोकती। तुम अभी के अभी इस मंडप से उठ जाओ बेटा। ये कहते हुए पंडित जी जैसे ही दुल्हन का हाथ पकड़ने को हो गए ,
वैसे ही पीछे से दो आदमी ने उन्हें पकड़ कर झटके से खींच लिया और सामने दूल्हे के बेस में बैठें आदमी गुस्से से अपनी जगह खड़ा हुआ और एक जोरदार थप्पड़ पंडित जी के मुंह पर मार दिया। जिससे पंडित जी संभाल नहीं पाए और मुंह के बल जमीन पर गिर पड़े इसी के साथ उनके होठों को के किनारे से खून बहने लगा ।
फिर वो आदमी गुस्से से झुक कर पंडित जी का मुंह दबाते हुए बोला, "साले दो टके के भिखारी, तू मेरी शादी तुड़वाएगा। तू मेरी होने वाली दुल्हन को भड़काएगा। अब देख तू देख, कैसे मैं इसके साथ शादी भी मनाऊंगा और सुहागरात भी।" कहते हुए उसने पंडित के पेट में एक लात मारी जिससे उनके मुंह से तेज़ चीख के साथ खून निकल आया।
और वो दूल्हा गुस्से से दुल्हन की ओर बढ़ गया।"
तो क्या पूरी होगी ये जबरदस्ती की शादी, या बनेगा कोई मसीहा उस लड़की का।?
कौन है ये लड़की और क्यूं कर रही है वो ये शादी चुपचाप ?
क्यूं कर रहे हैं उसके ही घर वाले उसके साथ ऐसा??
विक्रम वर्धन हथियारों और हेलीकॉप्टर के साथ मंडप में तबाही मचा देता है। दुल्हन को बंधा हुआ और बेहोश देखकर वह अपने ही खून से उसकी मांग भरकर एक खतरनाक खेल शुरू करता है।
इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए बने रहिए कहानी में आगे तक।।
चैप्टर पसंद आए तो उसे लाइक कमेंट शेयर जरूर करें और कहानी को रिव्यू करना ना भूले। मिलते हैं अगले चैप्टर में तब तक के लिए सभी का धन्यवाद।
रिपोर्ट की समस्या
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